क्या है खुश न रहने का कारण – एक महात्मा की कहानी

khush kaise rahe
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आज के इस ज़माने मे कोई भी आदमी इतना खुश क्यों नहीं है , क्युकी अब किसी के पास टाइम नहीं है | सब लोग पैसा के पीछे परेशान है , कोई किसी के बारे मे नहीं सोचता है , सब लोग अपने बारे मे ही सोचने मे लगे है | एक टाइम ऐसा था जब आदमी का महत्व बहुत था , लेकिन समय के साथ वह भी ख़तम हो गया और आज के ज़माने मे आप कितने भी ज्ञानी क्यों न हो अगर आप के पास पैसा नहीं है तो आप के साथ कोई भी रहना पसन् नहीं करेगा | आज मे आप को ऐसे ही एक कहानी के बारे मे बताने जा रहा हु की कैसे खुश रहे ?

एक चित्रकार की दर्द भरी कहानी

बहुत समय पहले की बात है एक आदमी एक महात्मा जी के पास पंहुचा और बोला मुनी जी मुजको बताये की मे खुश कैसे रहू | यह सुनकर महात्मा जी उसको अपने साथ जंगलो मे लेकर चले गए और वहा पर पड़े एक पत्थर को हाथ मे उठा लेने के लिए बोला | उस आदमी ने पत्थर को अपने हाथ मे उठा लिया और चलने लगा | थोरी दूर जाने के बाद उसके हाथ मे दर्द होने लगा , लेकिन वह कुछ नहीं बोला और चलता ही गया | कुछ दूर और चलने के बाद उसके हाथ मे जूर से दर्द होने लगा और उसने ऋषी मुनी जी से बोला महाराज मैरे हाथो मे जोर से दर्द हो रहा है | महात्मा जी ने कहा – तुम पत्थर को नीचे रख दो , उसने उस पत्थर को नीचे रख दिया और चलने लगा | थोरी दूर जाने के बाद महात्मा जी ने उस आदमी से पूछा – अब कैसा लग रहा है उसने बोला पत्थर को फेक कर मे बहुत ही खुश हु क्युकी मैरे हाथ का दर्द खत्म हो गया |
इस पर महात्मा जी ने बोला यही है खुशिओ का राज , हम लोग अपने जीवन मे इतने पत्थर उठा लेते है की हम कभी खुश रह ही नहीं सकते है | इसलिए अगर आप को खुश रहना है तो ऐसे पत्थर को फेकना होगा जो आप कप बहुत ही ज्यादा दरद देते है | वह आदमी यह बात समझ चूका था , उसने महात्मा जी से बोला – आप को बहुत – बहुत धन्यवाद |

नया सवेरा – एक अशिक्षित गावं की कहानी

दोस्तों खुशिया खरीदी नहीं जा सकती है , इसलिए हमेशा खुश रहिये | आप को यह कहानी कैसी लगी कमेंट करके जरुँर बताये |

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