आखिरी मुलाकात हिंदी प्रेम कहानी | यह कहानी आप को जरूर रुला देगी ।

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बड़ी देर तक दोनों खामोश बैठे रहे , दोनों में में कुछ भी बातें ना हुई .आखिरकार मोहित हंसकर स्नेहा के बाल सहलाने लगा .
हाथ झटकते हुए स्नेहा नें कहा, “थोड़ा हद में रहो , I am not your assets..Got it..
मोहित अचंभित होकर स्नेहा को एक टक देखने लगा.फिर अपना हाथ हौले से हटाकर अपने चेहरे को ढाँप लिया .
पिछले एक महीने से वो स्नेहा के व्यवहार में एक अजीब सा बदलाव देख रहा लेकिन ये 6 सालो में पहली बार था जब नेहा नें इतना rudely बात किया था .एक पल में ही मोहित की आँखों के सामने जाने कितनी यादें आ कर चली गयी ,जाने क्यों मोहित की आँखों के किनारे भीगने लगे थे .”और ये इमोश्नल ड्रामा बंद करो. मेरा दिमाग खराब हो जाता. पागलपन अपने पॉकेट में रखा करो ” नेहा नें गुस्से में कहा”मैं रो नहीं रहा हूँ बोलो कौन सी बात करनी” मोहित डूबती आवाज में बोला .”हाँ तो सुनो !! तुम्हारे साथ रहकर मेरी ज़िंदगी कैद हो गयी है। हर चीज का हिसाब देना पड़ता.कहाँ जाती हूँ क्या करती हूँ सब कुछ .
ये सब से मैं अब पक चुकी हूँ. सो तुम मेरे बगैर जीना शुरू कर दो .ना तुम्हें दिक्कत ना मुझे दिक्कत.” नेहा ने दो टूक सा जवाब दिया .
“अरे ऐसा कहाँ है? कौन किसकी आजादी छीन रहा है ?
मैं तो तुम्हारा खयाल रखने की वजह से ऐसा कहता रहता हूँ. जो वजह है वो बताओ ना मेरा दिल नहीं मान रहा.” मोहित ने खुद को सम्हालते हुए बोला.Care My Foot…तुम सब care का हवाला देकर हम लड़कियों की आजादी पर डाँका डालते हो और इस मुलाक़ात को आखिरी समझना दुबारा मेरे से कांटैक्ट करने की कोशिश भी मत करना .मैं तुम्हारी शक्ल नहीं देखना चाहती.
I Hate You … Hate You …. Hate You

 
” नेहा …नेहा …एक बात मेरी भी … “बाकि के शब्द मोहित के मुँह से निकलने से पहले ही स्नेहा नें अपना बैग उठाया और बिना पीछे मुड़े सीधा चलती गयी.उसके कदम तेज और तेज चलते जा रहे थे .मानो वो किसी दायरे से बाहर भागने की कोशिश में हो.मोहित ठगा सा वंही बैठा रहा .
उसको कुछ बातें समझ नहीं आ रही थी .ये वही पार्क था जहां से उसकी ज़िंदगी नें नई करवट ली थी. अचानक से स्नेहा का व्यवहार उसको पच ही नहीं रहा था .क्यूंकी 6 साल इतना कम समय न होता की कोई एक दूसरे को जान-पहचान ना पाए .फिर भी जो हो रहा था उसपर वो विश्वास कैसे ना करे. अजीब सा असमंजस था , मोहित के सामने दुश्मनों से तो लड़ा जा सकता पर यादों से लड़ना आसान काम कहाँ ?मोहीत थोड़ा शांत हुआ तो देखा एक रंग-बिरंगा कार्ड उसके बगल में गिरा हुआ था.” नेहा सिंह वेड्स अभिषेक चौहान ” बस बाकी माजरा मोहित के आगे आईने के समान साफ था .स्नेहा का बदलाव इसीलिए था कि वो मेरे दिल में नफरत भर सके|

 

वो धीरे धीरे पार्क से निकलने लगा तो देखा नेहा पार्क के एक कोने में बैठी धीमे धीमे सिसक रही थी .” नेहा….एक बार सुनो तो मेरी बात …” मोहित नें आवाज़ लगाई. मोहित की आवाज़ सुनकर स्नेहा आँसू पोछते हुए झट से पीछे घूमी और बोली….”गधे… नालायक…तुम्हारे भेजे में कोई बात आसानी से आती है की नहीं. मैं तुमसे प्यार नहीं करती ,नहीं करती , नहीं करती.” “तो किससे करती हो प्यार अभिषेक चौहान से ? “, मोहित नें कार्ड दिखाते हुए बोला.
अब नेहा को खुद को रोक पाना नामुमकिन था .उसके आँसू अब मोहित के आगे ही बिखर पड़े .नेहा लिपट गयी मोहित से , दोनों के आँसू नें ही जाने कितने सवालों के जवाब खुद ब खुद दे दिये.
“I will love you फोरेवेर….” जहां से कहानी शुरू हुई थी आज शायद वही पर आकर थम गयी….थम जाना कहना थोड़ा गलत होगा.
प्यार थमता नहीं , रुकता नहीं, चलता जाता है … बस चलता जाता है .
हाँ वो मुलाकात जरूर आखिरी थी|

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