ज्ञान का प्यासा – एक जज की कहानी

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बहुत समय पहले की बात है गोविंद रोनाडे हाई कोर्ट के जज थे | उनको बहुत सारे भाषाओं को सीखने का मन था ,अपने इसी शौक के कारण उन्होने अनेक भाषाओं को सीख लिया था | लेकिन वो बंगला भाषा अभी तक नही सीख पाए थे , उन्होने खूब प्रयाश किया लेकिन सीख नही पाए |अंत मे उनको एक उपाय सूझा , उन्होने एक बंगोली नाई को बुलाया और उस से अपनी हजामत बनवानी सुरू कर दी | नाई जेटने देर तक हजामत बनाता , वे उससे बंगला भाषा सीखते रहते |

क्या आप को पता है की आध्यात्मिक सुंदरता बाहरी सुंदरता से बड़ी है

रोनाडे की पत्नी को यह सब बहुत बुरा लग रहा था , उन्होने अपने पति से कहा – आप हाई कोर्ट के जज होकर एक नाई से भाषा सीखते है |कोई देखेगा तो हमारी क्या इज्ज्यत रह जाएगी , आप को बंगला सीखनी है तो किसी विद्वान को बुलाकर सीखो | रोनाडे ने मुस्कुरा कर उत्तर दिया- में तो ज्ञान का प्यासा हूँ , हमे जात- पात से क्या लेना -देना | यह बात सुनकर रोनाडे की पत्नी को बहुत अफसोस हुआ और बोला आप सही हो |

सुबह शाम की हवा लाख रुपये की दवा

दोस्तो इस कहानी से हमे यही सीखने को मिला की ज्ञान कही से मिले , बस ले लो |

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