क्रांतिकारी रामप्रशाद बिस्मिल की कहानी

ramprashad
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क्रांतिकारी रामप्रशाद बिस्मिल कारावास मे सजा भुगत रहे थे | अंग्रेजो ने उनको फांसी की सजा सुना दी थी , रामप्रशाद जी बहुत ही हिम्मत वाले क्रांतिकारी थे | उन्होंने दुसमन के  सामने कभी भी हार नहीं मानी | एक दिन उनके माता – पिता उनसे मिलने जेल मे गए , माता – पिता को देख कर बिस्मिल  की आँखों मे आँशु आ गए |

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उनकी आँखों मे आँशु देख उनकी माँ ने कहा – ये क्या तुम्हारा इंकलाब खत्म हो गया , मेरे बेटे से अंग्रेज सरकार कांपती है , इसलिए मे गर्व से सर ऊंचा कर के चलती थी | पर आज फांसी की सजा सुनकर तुम बच्चो की तरह रो रहे हो | माँ की यह बात सुनकर बिस्मिल सहम से गए और बोले- माँ तुम जानती हो की मे कायर नहीं हु |मे मौत से भी नहीं डरता , मेरी आँखों मे आँशु इसलिए है की मे तुम जैसी माँ फिर कहा पाउँगा , बिस्मिल की ये बात सुनकर उनकी माँ की आँखों से आँशु छलक पड़ा |

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