कर्मो की महानता -डॉक्टर जीवराज मेहता की कहानी

Jivraj_Mehta
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प्लेटफॉर्म पर काफी भीड़ थी परन्तु उनके स्वागत हेतु आये अधिकारियो व कार्यकर्तावो ने उन्हें परेशानी न होने दी | वे उन्हें सुरक्षित सीढ़ियों तक ले गए | जनसमूह सरप्राइज था की इतने बड़े अधिकारी किसके स्वागत के लिये खड़े है , परन्तु भीड़ से कुछ भी पता नहीं चला , अपना देश नया – नया आज़ाद हुवा था |

अहंकार का त्याग – एक राजा की कहानी 
एक अधिकारी ने विनम्रता से पूछा – यात्रा मई कोई कस्ट तो नहीं हुवा सर |
नहीं , आप के व्यवस्ता बहुत ही अच्छी थी – यात्रा मे कोई परेशानी नहीं हुवा , यह कहते हुये वो सीढ़ियों की तरफ बढ़ गए | उस तरफ गड़िया उनका इंतज़ार कर रही थी |
भीड़ मे बूढ़े , बच्चे , जवान और कुछ महिलाएं भी थी | उन्होंने देखा एक महिला अपने बच्चे को गोद मे उठाकर कठिनता से चल पा रही थी| उसके एक हाथ मे बक्सा , गोद मे बच्चा और दूसरे हाथ मे पोटली थी | उसकी पीड़ा देख कर वो आद्र हो गए , वे अधिकारियो के बीच मे से बिजली की फुर्ती से निकले और उस महिला से सन्दूक और पोटली छीन ली | उन्होंने अपने पन से कहा – बहन जब पल के उस पार आ जाना तो यह बक्सा और पोटली मुझसे ले लेना |यह कह कर वो आगे बढ़ गए | साथ मे आ रहे सारे अधिकारी दांग रह गए , आस – पास चल रहा जन समूह भी चकित था | लोग कह रहे थे की हमने तो सोचा भी न था की इतना बड़ा आदमी इतना सरल हो सकता है | ये महान आदमी डॉक्टर जीवराज मेहता थे , जो उन दिनों महात्मा गांधी के सचिव हुवा करते थे | इसलिए कहा गया है की आदमी अपने कर्मो से महान बनता है |

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