मुर्ख शिकारी और चालाक कबूतर की कहानी

ek kabutar ke kahani
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बहुत समय पहले की बात है एक शिकारी था , जो हर रोज जंगल मे जाकर बस शिकार करता था | एक दिन बहुत देर तक वह अपना जाल डाल कर बैठा था , लेकिन कोई भी शिकार उसके जाल मे आकर फस नहीं रहा था | कुछ टाइम बाद कड़ी धुप हो गयी और वह जंगले में ही सो गया , कुछ देर बाद जब वह सो कर उठा तो उसने जो देखा उसको देख कर वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गया | उसने देखा की एक कबूतर उसके जाल में आकर फस गया है और वह भागना चाहता है , लेकिन अब वह भाग नहीं सकता है |

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शिकारी ने कबूतर को पकड़ लिया और बोला अब में तुमको मार कर खाऊंगा | कबूतर बोला मरने से पहले मेरी आखरी इच्छा है की में तुम को कुछ बात बताना चाहती हू |
शिकारी ने बोला – बताओ तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या है ??
कबूतर ने बोला – मेरी माँ ने मुझको कुछ बात बताया था , जो मे तुमको बताना चाहती हु |

शिकारी बोला – तो बताओ कौन सी बात है ?
कबूतर ने बोला – पहली बात किसी भी इंसान पर बिना सोचे समझे भरोषा नहीं करना चाहिए और दूसरी बात कुछ बुरा या छूट जाने पर अफ़सोस नहीं करना चाहिए |

शिकारी ने उसकी बात को ध्यान नहीं दिया और बोला कुछ और बोलना है तो वह भी बोल दो , क्युकी अब तुमको कोई नहीं बचा सकता है मरने से |

थोड़ी दूर और जाने के बाद उस कबूतर ने शिकारी से बोला मेरे पास एक हीरे की अंगूठी है , अगर तुम मुझको छोड़ दो तो में तुमको वह अंगूठी दे दूंगी |
कबूतर की बात सुनकर शिकारी लालच में आ गया और उसको छोड़ दिया और बोला जल्दी से हीरा मुझको लाकर दे दो |

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शिकारी ने जैसी ही कबूतर को छोड़ा – वह दूर पेड़ पर जाकर बैठ गयी और वही से खूब हसने लगी और बोली तुम मुर्ख हो | मेरे पास तो कोई हीरा नहीं है और मैंने तुमको बताया था की बिना सोचे किसी पर भरोषा मत करो , लेकिन तुम नहीं माने | यह सुनकर शिकारी बहुत ही उदाश हो गया और सोचने लगा की काश ऐसी गलती मैंने न किया होता तो आज कबूतर मेरे पास होती |

इस कहानी से हम लोगो को यही सीख मिलता है की हम लोगो को बिना जाने किसी भी अनजान पर भरोषा नहीं करना चाहिए ||

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2 thoughts on “मुर्ख शिकारी और चालाक कबूतर की कहानी

  1. बहुत ही अच्छी कहानी है

    1. hindibabu

      Thanks mam .

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