पंडित जी की महानता जो दिल को छू गयी

pandit je ke kahani
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एक नगर में एक पंडित जी रहते थे , पंडित जी का स्वभाव बहुत ही सरल था और उनको किसी भी चीज का लालच नहीं था | आज पंडित जी सुबह बच्चों को पढ़ाने जा रहे थे तो उनकी पत्नी बोली शाम के खाने के लिए बस एक मुठी चावल है और कुछ नहीं | पंडित जी बिना कुछ बोले ही निकल दिए , और शाम को जब घर वापस आये तो उनकी पत्नी ने उनको खाना खाने को दिया , इस पर पंडित जी ने बोला ये साग तो बहुत ही अच्छा है | तुम ने कहा से लाया है ये , इस पर उनकी पत्नी ने बोला आज सुबह जब मैंने आप से पूछा की घर में बस एक मुठी चावल है तो आप ने इमली के पेड़ की तरफ जब देखा तभी में समझ गयी थी और मैंने इमली का साग बनाया है | इस पर पंडित जी ने कहा अब तो हम को भोजन की कोई चिंता करने की जरुरत ही नहीं है |

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पंडित जी जिस नगर में रहते थे जब उस नगर के राजा को पंडित जी की गरीबी का पता चला तो राजा ने पंडित जी को अपने महल के पास आकर रहने का प्रस्ताव दिया , लेकिन पंडित जी ने मना कर दिया | इस पर राजा को बहुत अजीब सा लगा और वह खुद पंडित जी की छोटी सी कुटिया में मिलने के लिए पहुंच गया | राजा जब पंडित जी की कुटिया में पंहुचा तो थोड़ी देर बात करने के बाद पूछा – पंडित जी आप को कोई तकलीफ तो नहीं है न यहाँ | इस पर पंडित जी ने बोला – यह बात तो आप हमारी पत्नी से पूछ ली जिये | फिर यही बात राजा ने उनकी पत्नी से पूछा – तो पंडित जी की पत्नी ने बोला नहीं अभी तो मेरे कपडे फाटे भी नहीं है और मटका भी नहीं टुटा है और इमली का पेड़ भी है | इसलिए हम लोगो को अभी कोई भी परेशानी नहीं है , हम दोनो लोग बहुत ही काम चीजों में ही बहुत ही खुश रहते है | यह बात सुनकर राज बहुत ही खुश हुवा और उन दोनों लोगो को प्रणाम करके अपने राज्य वापस चला गया |

दोस्तों इस कहानी से हम लोगो को यही सीख मिलती है की , अपने जीवन में खुश रहना सीखो | जरूरी नहीं है की आप के पास राज महल हो तभी आप खुश रह सकते है |

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