आतंकवादी पिता और देश भक्त पुत्र की कहानी

terrorist father story
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वह नवी क्लास मे पढता था | पढ़ाई – लिखाई मे अच्छा तो था ही , साथ मे खेल – कूद मे भी हमेसा फर्स्ट आता था | घर मे उसके अलावा कोई और नहीं था , पिता जी भी कोई नौकरी नहीं करते थे , लेकिन पता नहीं क्यों महीने मे एक बार वो दूसरे शहर के टूर पर जरूर जाते थे | एक दिन उसने पूछ ही लिया – पिता जी , आप महीने मे एक बार हमेसा अकेले ही दूसरे नगर क्यों जाते हो ?

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उसके पिता जी ने उसको समझाया – बेटा पहले मे सरकारी नौकरीमे था , लेकिन तुमाहरी माँ के निधन के बाद मैंने नौकरी ोड़ दी | मुझको अपने जमा पैसो का कुछ अंश पेंशन के रूप मे मिलता है , जिसको लेने मे शहर जाता हु | यह बात सुनकर बालक चुप हो गया और वहा से चला गया | जनवरी माह आ गया था , उस बालक ने पिछले साल की तरह इस साल भी वह अच्छी तरह से पढ़ाई मे लग गया और देर रात तक पढ़ाई करता रहता था | हर दिन की तरह वह अपने कमरे मे बैठ कर पढ़ रहा था की अचानक एक सफ़ेद कार उसके घर के सामने आकर रुकी | वह खीड़की से झाँकने लगा , उसने देखा तीन आदमी कार से उतरकर बाते कर रहे थे |

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कुछ देर बाद एक आदमी ने कार से एक पैकेट निकालकर उसके पिता को दिया और उनसे कहने लगा आज रात को इस्पात कारखाना खत्म | और सब हँसने लगे , यह बात सुनकर बालक को सक हो गया था की उस पैकेट मे कोई विस्फोटक चीज है | वह बाहर वाले दरवाजे से बाहर निकल कर अपने पड़ोसी मित्र के पास जाकर पुलिस को इन्फॉर्म कर दिया और चुप – चाप अपने कमरे मे आ गया | रात के करीब बारह बजे उसके पिता जैसे ही बाहर निकले पुलिस ने उनको रंगे हाथो पकड़ लिया | उसके पिता जोर – जोर से कहने लगे कौन मूरख है जो मुझको पकड़वाया है | अपने पिता की आवाज सुनकर वह बालक सीना तानकर उनके सामने आकर खरा हो गया | उसको देख कर उसके पिता की आँखों मे आँशु आ गया और चुप – चाप वहा से चले गए | अपने देश की सेवा कर वह बालक बहुत ही गर्व महसूस कर रहा था | बाद मे बड़ा होकर यही बालक भारत सरकार के लिए ख़ुफ़िया का काम किया |

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