साधु के क्रोध और प्यार की कहानी

साधु के क्रोध और प्यार की कहानी
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फरुखाबाद गंगा का तट , आशा के विपरीत एक साधु बहुत देर तक गालियां बकता रहा | जब गालियां बकते -बकते थक गया तो अपने कुटिया के भीतर चला गया | अगले दिन फिर सुबह वही सिलसिला , लोग हैरान रहते की यह कैसा साधु है जो की भगवान् के भजन के बजाय गालियो के प्रवचन करता है |उसकी कुटिया से थोड़ी ही दूर पर एक और कुटिया बनी हुई थी , उसमें एक महात्मा रहते थे | पता चला की वह साधु उन्ही पर गलीयो की बारिश करता था…

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