कोयल और बगुला की कहानी

कोयल और बगुला  की कहानी
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फागुन का महीना था| बसंत ऋतु थी , आम के पेड़ पर बैठ कर सुबह -सुबह कोयल कु – कु कर रही थी | कोयल की मीठी और सुरीली आवाज सुनकर एक बगुला उसके करीब आ पंहुचा , और फिर आकर बोला , कोयल बहन तुम्हारी आवाज मे तो बहुत मिठास है | तो फिर ? मगर तुम्हारी  सूरत तो  काली है , भगवान ने सचमुच बहुत बड़ी गलती की है , बगुला बोला | क्रांतिकारी रामप्रशाद बिस्मिल की कहानी कैसी गलती ? कोयल उत्सुक हो कर बोली | बगुला…

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