गुस्से से गुस्से की तकरार हो गयी – एक बहुत ही सुन्दर कविता

गुस्से से गुस्से की तकरार हो गयी – एक बहुत ही सुन्दर कविता
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गुस्से से गुस्से की तकरार हो गयी– गुस्से से गुस्से की तकरार हो गयी जिह्वा भी गुस्से की ही भेंट चढ़ गयी एक गुस्से में बोले एक तो दूजा चार बोलता जिह्वा बेचारी सबके सामने शर्मसार हो गयी | गुस्से से गुस्से की तकरार हो गयी …………   गालियां  बकते एक दूजे को अचानक आपस में ही मारामार हो गयी एक ने चलाया हाथ दूजा करे पैर से वार देखते देखते कुटमकाट हो गयी | गुस्से से गुस्से की तकरार हो गयी ……….   एक ने सर फोड़ा तो दूजे…

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पूर्ण विशवास की कविता – जो तुझको अपना बना बैठे , उनको दीवाना क्यों समझे

पूर्ण विशवास की कविता – जो तुझको अपना बना बैठे , उनको दीवाना क्यों समझे
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जब तेरे दर पर आ बैठे , कोई और ठीकाना क्यों समझे | जो तुझको अपना बना बैठे , उनको दीवाना क्यों समझे |   जब तेरे हुए तेरे रहे , ये जादू नहीं करिश्मा भी नहीं | यह तेरी ही बस रहमत है , कोई और बहाना क्यों समझे | जो तुझको अपना बना बैठे , उनको दीवाना क्यों समझे |   साकी की नजरो से सबको , वहदत की मय मिल जाती है | ए जाहिद यह तो काबा है , इसको मयखाना क्यों समझे | जो तुझको…

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