संघर्ष बेटी का – दिल को छू लेने वाली सच्ची कहानी

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किसी की आप बीती

# संघर्ष बेटी का #

समझ नही अाता कहा से शुरू करू मेरे संघर्ष की कहानी 
ये संघर्ष लडकी होने के नाते किया खासकर पढाई के लिये. इस लिये में share करना चाहती हूँ ताकी ओर लोग इससे प्रेरित हो सके.मेरा जन्म UP के छोटे से गांव मे एक ऐसे परिवार में हुआ था जहा बेटो को ज्यादा अहमियत दी जाती है बेटी से .जब से होश संभाला हर छोटी छोटी चीज के लिये समझोते किये बेटे की हर फरमाइश पूरी हो जाती ,जब की मेरी नहीं. समझोते से तारीफ ज़रूर मिलती थी. समझोते बढ़ते गये तारीफें मिलती गयी और मेरी भावनाये घूटती रही|

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मॅ शुरू से ही पढाई मे बहुत अछी थी और मुझे पढने का बहुत शौक था पर मेरे रास्ते मे बहुत रूकावटे आयी मेरे मा बाप ने मेरी शादी की ठानी.उस समय में 10वी कक्षा में थी. पहले कहते थे 12वी करा देंगे पर मेरी शादी 15 साल की नाबालिग उम्र में हो गयी मेरे पती भी शुरू में पढाई करवाना चाहते थे पर सास के आगे उनकी एक ना चली फिर में मायके अा गयी मेरे साथ की लड़किया 12वी के फोर्म भर रही थी मेने भी पापा से लड़कर फोर्म भर दिया पढाई में होशियार होने के कारण कम समय मे त्यारी करली. ले किनं परिक्षा से 4 दिंन पहले मेरे पैर में फरक्चर हो गया पापा कहने लगे रहने दे परिक्षा को 3 दिंन के निर्जल उपवास के बाद पापा माने तब कही परिक्षा दे पायी. अछे नम्बर से पास हो गयी

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एक साल बाद ससुराल वापिस आयी मैं आगे BA करना चाहती थी प्राईवेट पेपर के फोर्म भरना चाहती थी पर पती ने मना कर दिया सास ने बहुत डाटा पर पती के एक दोस्त ने मुझे फोर्म ला कर दिया उस समय में गर्भवती थी तौ काम के साथ साथ पढती भी थी. कभी दाल सबजी में कमी होती तो डां ट पड़ती थी सास से. वेसे भी पढने का समय कम लगता था. इसलिये मेने तब पढना शुरू किया जब सब सो जाते थे. परिक्षा से ठीक 20 दिंन पहले मेरा पहला बेटा हुआ ऐसी हालत में परिक्षा दी मेने और अछे मार्क्स आये. इसी तरह MA भी पास करलीसास के अत्याचार भी इस बीच चलते रहे में भी अबला नारी सब सहती रही फिर 3 साल बाद मेरा दुसरा बे टा हुआ वो मुझे अपने मायके में ही कर वाना पडा क्योंकी सास आत्याचार करती थीफिर मेरी ज़िन्दगी में वो मनहुस दिनं आया जो भगवान किसी को ना दिखाये उस दिनं मेरे पती मुझे हमेशा हमेशा के लिये छोड गये. ऊँनकी मौत भी एक अन शुलझी पहेली है उनकी लाश खेत में मिली ना तो postmortom होने दिया पुलिस भी मिल गयी थी अपराधियों से. जो भी हुआ मेरी तो दुनिया ही ऊजड गयी
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मेरे ससुराल वाले मुझे रखना चाहते थे पर मेरे पापा बोले जो लोग पती के सामने सम्मान नहीं देते वो अब क्या खाक देंगे. वो मुझे अपने साथ ले आये बोले बेटी नहीं बेटा बनाकार रखूंगा तब से उनके साथ ही हूँ.पापा नौकरी के लिये मना करते रहे मेने ज़िद करके छोटी सी नौकरी ढूंड ली धीरे धीरे आज अछी post पर हूँ जहा अपने बच्चो को स्वाभीमान के साथ पाल सकती हूँ |अंत में इतना ही कहना चाहुंगी इंसान अगर ठान ले कुच्छ भी कर सकता है और पढाई सभी को करनी चाहिये इसके बिंना जीवन अधुरा हैं अगर मेने पढाई के लिये संघर्ष नहीं किया होता तो अपने पेरो पर खडी नहीं हो सकती थी|

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