मंदिर के पुजारी की कहानी

06-1446792150-birlamandire
Share Button

एक बहुत ही बड़ा व्यापारी था , वह अपने गाव मे एक मंदिर बनवाना चाहता था | उसके एक गुरु जी थे जिनको वह बहुत ही ज्यादा मानता था , वह गुरी जी के पास गया और उंनसे अपने मन की बात को बताया और बोला गुरूजी हमारी मदद करो | गुरु जी ने बोला तुम गावं और नगर दोनों जगह मंदिर बनवा दो अगर इतना ही तुम्हारा मन है | उसके बाद वह गुरु जी की बात मान कर दो मंदिर बनवाना सुरु कर दिया था , जब मंदिर बन गया तो उसने दो पुजारी को मंदिर के लिए बुलाया और दोनों को अलग – अलग जगह भेज दिया | एक पुजारी गावं वाले मंदिर पर और एक नगर वाले मंदिर पर रहने लगा |

 आतंकवादी पिता और देश भक्त पुत्र की कहानी

समय बीतात गया और एक दिन व्यापारी दोनों मंदिरों को देखने निकला की कोई मंदिर मे आता भी है या ऐसे ही है | उसने देखा की नगर के लोग भी गावं वाले मंदिर पर जाते है , यह देख कर वह बहुत ही परेशान हो गया और फिर अपने गुरु जी के पास गया और उनको सारी बात बताया | गुरु जी ने बोला आप एक काम करो दोनों पुजारियों का मंदिर बदल दो | व्यापारी अगले दिन आया और दोनों पुजारियों का मंदिर बदल दिया , उसने देखा की जैसे ही पुजारी बदले अब सारे गावं वाले नगर के मंदिर जाने लगे | वह फिर परेशान होकर अपने गुरु जी के पास गया और सारी बात बताया , गुरु जी समझ गये और बोले – देखो उन दोनों पुजारियों मे जहा पर बहुत लोग जाते है उस पुजारी का स्वभाव बहुत ही अच्छा है , वह लोगो से बहुत ही अच्छे से बात करता है | जबकी दूसरा पुजारी जो है वह बहुत ही घमंडी है और किसी का भी आदर नहीं करता है | व्यापारी समझ गया और उसने दुसरे पुजारी को मंदिर से नीकाल दिया |

दोस्तों ऐसे ही हम लोगो के जीवन मे भी होता है , अगर हम किसी से सही से बात नहीं करेंगे तो कोई हमारे पास नहीं आएगा और न ही हम से सही से बात करेगा | एक ही जीवन है तो क्यों किसी से लड़ना , सब से मिल कर रहो और खुश रहो |

कुछ अनसुनी बाते जो आप को सोचने पर मजबूर कर देंगीं

Share Button

loading...
loading...

Related posts

Leave a Comment