जब पापा की आँखे भर आयी | छोटी बच्ची और गोल गप्पे वाले की कहानी

gol gappe wale ke kahani
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पापा के पास बस दस रूपया ही बचा था , उनको घर भी जाना था जो पैसा किराये में लग जाता । सामने एक बहुत ही अच्छा बंदा था जो की गोल गप्पे बेच रहा था । मैंने अपने पापा से जिद कर दिया और उनसे बोला मुझको गोल गप्पे खाने है । मै भी साथ में खड़ा था और सब कुछ देख रहा था । लड़की के पापा ने पूछ लिया भाई पांच रुपए के दस मिल जायेगा .गोल गप्पे वाले ने बोला नहीं मिलेगा । इतने में सिर्फ दो ही आप को मिल पायेगा , फिर क्या था वह बच्ची अपने पापा से जिद ही करने लगी और बोली नहीं मुझको खाना ही है तभी मै जाउंगी ।

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छोटी बच्ची को रोते हुए देख गोल गपे वाले ने बोला अरे भाई खिला दो न जब तक बेटी तुम्हारे पास है तभी तक तो तुमसे मांगेगी उसके बाद तो नहीं न मांगेगी ।

 

 
गोल गप्पे वाले की इस बात को सुनकर , पापा को अपनी बड़ी बेटी की याद आ गयी और वह सोचने लगे की मेरी बड़ी बेटी जिसकी शादी होती ही ससुराल वालो ने उसको पैसो के लिए परेशान करना सुरु कर दिया था । वह भी बहुत ही परेशान थी और एक दिन उसने मौत को गले लगा लिया , वह अपने जीवन से हार गयी ।

यह बात सोचते हुए लड़की के पापा सामान वाली दूकान पर गए और एक किलो चावल वापस कर दिया और बोला मुझको पैसा दे दो , कल आकर और लूंगा । फिर क्या था उस आदमी ने अपनी छोटी बेटी को खुश करने के लिए ऐसा किया और फिर उसको गोल गप्पे खिलाया ।

हम सब लोगो को बेटी जबतक आप के घर में तभी तक वह अपने पापा , माँ और भाई से कुछ करने के लिए कहती है और हम सब लोगो को यह बात अपने दिमाग में रख लेना चाहिए की बेटिया ही घर की लक्मी है । जब तक वह अपने माँ – बाप के साथ है उनको कर खुसी दो , पता नहीं कल को उनको किस तरह का ससुराल मिल जाये और उनको वह क्या – क्या सहना पड़े ।

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