कैसे दुसरो के लिए जीना सीखे – बदलाव एक अनोखी कहानी

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आज मैं आप लोगो को एक ऐसी कहानी बता रहा हू जो आप को दूसरो के लिए जीने की प्रेरणा देगी | एक लडकी थी जो बहुत ही मोटी थी और हमेशा अपना वजन कम करना चाहती थी , लेकिन कर नहीं पाती थी | वह बहुत ही आलशी थी और हमेशा अपने ही भले के बारे मे सोचा करती थी , अपने बढे हुवे वजन को कम करने के लिए उसने रोज सुबह – सुबह दौड़ लगाना सुरु कर दिया |

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जहा वह दौड़ लगाने को जाती थी वही पर एक बूढ़े दादा जी आकर कुछ कछुवो की पीठ पर लगे कीचड़ को साफ़ करते थे | वह लडकी बहुत ही ध्यान से यह सब कुछ दिनों तक देखती रही और जब उससे रहा नहीं गया तो उसने सोचा की आज क्यों न बूढ़े अंकल से पूछ लू की आप ऐसा क्यू करते हो | आज सुबह लडकी थोड़ी पहले आ गयी और आते ही उस बूढ़े से दादा जी के पास पहुच गयी और बोली अंकल आप को रोज मैं यही करते देखती हू की आप कछुवो की पीठ क्यू साफ़ करते हो , इससे आप को क्या मिलता है | उसे बूढ़े से दादा जी ने बोला – सबसे पहले मैं आप को यह बता दू की हर काम अपने मतलब के लिए ही नहीं किया जाता है | मैं यहाँ इसलिए आता हू की इन कछुवो के पीठ पर जो कवच होता है उसमे कचड़ा जम जाता है जिससे की उनको पानी मे तैरने मे बहुत ही परेशानी होती है | तो मैं यहाँ आकर उनका काम थोडा आशान कर देता हू और यह सब करने से मुझको बहुत ही ज्यादा खुशी मिलती है | लडकी उस दादा जी का चेहरा देख रही थी और बोला और एक सवाल मन मे है आप बोलो तो पूछ लू |
दादा जी ने बड़े ही प्यार से बोला बेटा आप को जो पूछना है पूछ लू |

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लडकी ने बोला – पर सिर्फ आप के करने से ही सारे कछुवो का पीठ साफ़ नहीं हो जायेंगे , बहुत सारे कछुवा है इस दुनिया मे आप सबका पीठ तो साफ़ नहीं कर सकते हो | इस बात को सुनकर दादा जी ने बोला – मुझको भी यह बात पता है की मै सबका पीठ तो साफ़ नहीं कर सकता , लेकिन जितना मुझसे हो सकता है उतना तो मैं करूँगा और इससे कुछ लोगो की मुस्किल का हल तो हो जायेगा | दादा जी की यह बात सुनकर वह लडकी बहुत ही खुश हो गयी और उसी टाइम सोच लिया की मुजको भी इस दुनिया मैं कुछ करना है दूसरो के लिए |

तो दोस्तों इस कहानी से हम लोगो को यही सीख मिलता है की जीवन मैं सिर्फ अपने बारे मे ही मत सोचो , कभी दूसरो के लिए भी कुछ कर के देखो कितना सुकून मिलता है ||

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