त्याग का परिणाम |कहानी एक बार जरूर पढ़े |

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ललित आज बहुत उत्साहित और ख़ुश था, उसे ट्यूशन पढ़ा के जो पैसे मिलते थे उनमे से और उसे मिलने वाले थोड़े से जेबखर्च में से कुछ बचा के पिछले दो साल में उसने लगभग 20 हज़ार रुपये इकठ्ठे कर लिए थे, अब एक नया स्मार्टफोन लेने की उसकी काफी समय से चली आ रही इच्छा पूरी होने वाली थी। अभी तक तो वो पुराने 1600 रुपये वाले फ़ोन से ही काम चला रहा था, जो उसे पिताजी ने ये कह के दिलवाया था कि ‘कॉल हो जाए… बहुत है, मेरी हैसीयत इतनी ही है, महंगे शौक पूरे करने हैं तो ख़ुद कमाओ, एक लड़की की शादी भी करनी है मुझे। माँ, पिताजी, छोटी बहन तनु और ललित, चार जनों का ये परिवार एक साधारण घर में पिताजी की थोड़ी सी आय में बस गुजारा कर ही रहा था। ललित कॉलेज के अंतिम वर्ष और तनु प्रथम वर्ष में थे।


ललित पैसे लेकर गुनगुनाता हुआ घर से बाहर जा ही रहा था कि उसने तनु को उदास बैठे देख पूछा, “ओए, गिलहरी क्या हुआ तुझे, मुँह लटका के क्यूँ बैठी है” ? “भाई, हमारे कॉलेज की साउथ इंडिया साईट सीइंग ट्रिप जा रही है, जो जाना चाहे उसे 14000 रुपये देने होंगे, बाकी पैसे कॉलेज मिलाएगा, 8 दिन का ट्रिप है, आना-जाना, रहना और खाना सब उसीमे हैl” ललित चहकते हुए बोला, “अच्छा… !!!, तू जा रही है क्या”? तनु ने दूसरी तरफ देख के अपने आँसू छिपाए और बोली, “नहीं, मेरी हिम्मत नहीं हुई, पापा से इतने रुपये मांगने की , जितना वो कर……” उसकी बात को काटता हुआ ललित बोला, “अच्छा, अच्छा… मेरा मूड ख़राब मत कर, मै तो नया मोबाइल लेने जा रहा हूँ” तनु उदास नज़रों से देखती रही और ललित उसको अनदेखा करता हुआ, बाहर चला गया।


कुछ देर बाद एक कैरी बैग लिए वो अन्दर आया और शोर मचाते हुए बोला, “तनु… आ देख मेरा मोबाइल फ़ोन।” उदास आवाज़ में तनु बोली, “मुझे नहीं देखना”, उसके हाथों में ज़बरदस्ती बैग पकड़ा के ललित बोला, “देख तो ले…” तनु ने उसके हाथ से बैग लिया और खोला तो हैरानी से बोली, “कहाँ है मोबाइल” ? बैग में एक लिफाफा और एक कागज़ रखा था, उसने कागज़ खोला और पढने लगी…..
‘नया फ़ोन लेने का मन नहीं है, गुड्डू…. वैसे भी मेरा ये वाला फ़ोन ठीक चल रहा है, इस लिफाफे में 20000 रुपये हैं, 14000 जमा करा देना, और तेरी शौपिंग के लिए 6000 से ज्यादा नहीं हैं मेरे पास, मोटू।”


“भैया…” कह कर ललित के गले लग गई तनु, दरवाजे के पीछे खड़े पिताजी ने माँ से कहा, “त्याग का जो बीज ललित ने आज बोया है, देखना… एक दिन उस पर सुन्दर फूल खिलेंगे।

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