अहंकार का त्याग – एक राजा की कहानी

king story
Share Button

एक महात्मा किसी  राजा के महल मे पहुंचे , महात्मा को अपने महल मे आया देख कर वह बहुत ही खुश हुवा और बोल – आज मेरी मर्जी है की आप को मुंह माँगा उपहार दू |

महात्मा ने कहा- आप अपने मन से सब प्रिय बस्तु दे दो  , मे क्या मांगू |

राजा ने कहा – मे अपने राज्य का सारा कोष आप को समर्पित करता हु |

उस महान ने उत्तर  दिया – यह कोष तो प्रजा का है , आप तो बस इसकी देख कर रहे हो |

राजन ने यह बात स्वीकारा और बोले – यह महल, सवारी सब मेरे है आप इनको ले लो |

डाकू से सीख – एक बालक की कहानी

राजा की यह बात सुनकर मुनी जी हसे और बोले – राजन आप भूल जाते हो यह सब प्रजा का ही है , आप को यह सब आप की सुभिधा के लिए दिया गया है तकी आप ठीक तरह से राज्य का देख – रेख कर सके |

इस बार राजा ने अपना सरीर दान देने का विचार उनके सामने रखा | इस पर महात्मा ने कहा – यह सरीर आप का जरूर है , मगर इस पर भी आप की पत्नी और बच्चो का हक़ है , फिर भला आप अकेले यह डिसिशन कैसे लोगे |

परिश्रम का फल – जार्ज स्टीफेंस की कहानी

महात्मा का यह उत्तर सुकर राजा बहुत ही असमंजस मे पड़ गए , राजा को असमंजस मे पड़ा देख मुनी जी ने कहा – आप के मन का अहंकार जरूर आप का है | अहंकार ही आदमी को नीचे गिरता है , आप इस को दान कर सकते हो | महात्मा की बात राजा को समाज मे आ गई और इस घटना के बाद राजा ने अहंकार करना छोड़ दिया |

Share Button

loading...
loading...

Related posts

One thought on “अहंकार का त्याग – एक राजा की कहानी

  1. […] अहंकार का त्याग – एक राजा की कहानी  एक अधिकारी ने विनम्रता से पूछा – यात्रा मई कोई कस्ट तो नहीं हुवा सर | नहीं , आप के व्यवस्ता बहुत ही अच्छी थी – यात्रा मे कोई परेशानी नहीं हुवा , यह कहते हुये वो सीढ़ियों की तरफ बढ़ गए | उस तरफ गड़िया उनका इंतज़ार कर रही थी | भीड़ मे बूढ़े , बच्चे , जवान और कुछ महिलाएं भी थी | उन्होंने देखा एक महिला अपने बच्चे को गोद मे उठाकर कठिनता से चल पा रही थी| उसके एक हाथ मे बक्सा , गोद मे बच्चा और दूसरे हाथ मे पोटली थी | उसकी पीड़ा देख कर वो आद्र हो गए , वे अधिकारियो के बीच मे से बिजली की फुर्ती से निकले और उस महिला से सन्दूक और पोटली छीन ली | उन्होंने अपने पन से कहा – बहन जब पल के उस पार आ जाना तो यह बक्सा और पोटली मुझसे ले लेना |यह कह कर वो आगे बढ़ गए | साथ मे आ रहे सारे अधिकारी दांग रह गए , आस – पास चल रहा जन समूह भी चकित था | लोग कह रहे थे की हमने तो सोचा भी न था की इतना बड़ा आदमी इतना सरल हो सकता है | ये महान आदमी डॉक्टर जीवराज मेहता थे , जो उन दिनों महात्मा गांधी के सचिव हुवा करते थे | इसलिए कहा गया है की आदमी अपने कर्मो से महान बनता है | […]

Leave a Comment