राखी की लाज – एक बीर बालक की कहानी

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दोपहर का समय था रामनगर के लोग इकठा हुए थे | गाव से कुछ दूरी पर एक नदी थी , जिसमे तैराक गोता लगाकर अपनी कला का प्रदर्सन करते थे | एक सैलानी घूमता – फिरता वहां आया , अपने कपडे उतारे और स्नान करने लगा लेकिन उसको यह नहीं पता था की यहाँ पानी बहुत जादा गहरा है | पलक झपटे ही वह पानी की लहरों की चपेट मे आ गया और जोर -२ से चिलाने लगा बचवो -२ | भाग्य वश वहां करन नाम का एक लड़का खड़ा था | उसकी आवाज सुनकर वह नदी मे कूद पड़ा |कुछ ही देर मे वह डूबते हुए सैलानी के निकट पहुंच गया और उसके बालों को पकड़ कर नदी के किनारे पर लाया |

सभी लोग उस बीर बालक की साहस को देख कर दंग रह गए | करन ने गर्व से बताया की आज मैंने राखी की लाज रख ली |
वो कैसे – करन की बहन ने पूछा |

करन ने बताया – आज मैंने एक डूबते आदमी को बचा लिया | राखी भी तो इसलिए ही बांधी जाती है | यह सुनकर वहां खड़े सब लोग तालिया बजाने लगे और अपने घर चले गए |

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