एक औरत का दर्द जो वो किसे और से नहीं कह सकती है |

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बहुत कुछ होता हुआ देख कुछ लिखा मैने मेरी सोच समझ जितनी है उस हिसाब से….. न किसी कहानी के तौर पर लिखा है मै मेरी खुद की भाषाशैली का प्रयोग किया है।आखिर हम क्यो करें औरत की इज्जत क्या देती है, वो हमे क्या दिया उसने आजतक हमे हम तो शादी करके लाये है सारे काम करवायेंगे घर के, हम जो कहेंगे उसे करना पडेगा नौकरानी जो ठहरी, बच्चे पैदा करे झाड़ू ,बरतन कपडे, सास के ताने ननद की बाते पति की लातें सब सहे इत्यादि कार्य करे, हमारा जब मन हुआ उस पर आग जैसे बरस गये ओर पीट के रख दिया 😑 क्यो क्योकि उसके मा बाप ने उसे आपके यंहा गिरवी जो रखा है ना क्यो सही कहा ना जरा सोंचना कि ऐसे ही नही उसके मां बाप एक फूल सी बच्ची को विदा करते समय रोते है, उस मां को अच्छी तरह पता होता है कि कैसे अपने घर आंगन को छोडकर यंहा एक अजनबी के यंहा आयी थी कितनी मुश्किलो से किस तरह के हालतो से गुजरना पडा सायद आज अपनी बेटी के भविष्य को सोंच कर कराह के रह जाती है मगर अफसोस कि उस फूल सी बच्ची को अपने मा का दामन न चाहते हुये भी छोडना पडता है।😣 आखिर कर ही क्या सकते है बेचारी अपनी 22-23 वर्ष की उम्र इन्ही सपनों के बीच गुजार देती है कि ससुराल जाकर अपने पति का कैसे ख्याल रखना है उन्हे समय से खाना समय से सोना बहुत सारी चीजे और बदकिस्मती कि उसे ऐसे इंसान के साथ पाला पड जाता है कि सारी उमर अपने करम को दोष देती है और मजबूर, घुट-घुट के सारी जिंदगी जीने की ठान लेती है। ए इंसान इस औरत के दर्द के पूरी तरह तो आप नही जान पाओगे, पर कभी उसके आधे दर्द को समझकर सिर्फ महसूस करना क्योकि उसे बरदास्त करने की हिम्मत आपमे कभी नही आ सकती है।

आज ही छोटी सी नोकझोक को देखकर मन विचलित सा हो गया और चिन्तन इस बात कि कैसे एक मर्द उस औरत के ऐसी जगह पे लात से मार देता है जंहा से वो एक मर्द पैदा करती है 😣 क्या हम इतने बेरहम है नही कभी महसूस करना कि उस माहवारी के 4 दिनो के दोरान क्या हालत होती है कैसे दिन निकलता है। पर ये कंहा समझ पाते है हमे तो उस पर घोर अत्याचार करना है ना। आप अपनी अपनी लघुशंका (शौंच क्रिया) को 3 मिनट भी नही बरदास्त कर पाते हो मगर उनमे 3 घंटे की क्षमता आ जाती है क्यो वो अलग से कुछ खाती है क्या नही जनाब आप नही वो आपसे ज्यादा ताकतवर और हिम्मतवाली है।पर हम उन्हे एक बंधन मे रखते है उसे कमजोर बनाते है जिससे उनका मनोबल कम हो जाता है, आप ही बताइये उसी घर मे आपके लाड प्यार और मां-बाप के अच्छे संस्कारो के बीच पली बढ़ी आप ही की बहन जब दूसरे जाती है तो उस घर को स्वर्ग बना देती है तो आप भी उसी घर के हो ना कहा जाता है कि “बेटा बेटी एक समान तो फिर आपमे #असमानता क्यों ? वो भी किसी की बहन हे ना आप उसके बुरे हाल मे अगर उसका सहारा बन के कुछ मदद कर दोगे तो “जोरू के गुलाम” कहलाओगे हेना अच्छा मुझे बताइये कि आपकी पत्नी किसी तरहके शारीरिक कष्ट से पीड़ित है उसे अगर आप हांथ लगा देने मे उसे ताकत मिलती है तो आप उसे करने से मना कर देंगे क्यो क्योकि आप जोरू के गुलाम नही बनना चाहते हो हेना ? जनाब एक बात जब तक आप शादी नहि करते है ना तो आपकी ताकत मां बाप होते है, मगर शादी के बाद आपकी आन ,शान ,बान, आपकी ताकत, आपकी इज्जत आपकी स्वयं की पत्नी ही है और फिर आप अपने मां बाप की ताकत होते हो |
क्यो प्रताड़ित करते है हम उसे मतलब जब हमारा मन हुआ तो गाली गलोज किये मार दिये उसे 8 बजे खाना बनाने को बोला उसने किसी कारण वश 9 बजे बनाया तो आप आक्रामक स्वभाव के हो जाओ उन पर जुल्म करो नही
उनकी एक दिन की दिनचर्या अगर निभा लेना तब अपने मे विचार करना कि क्या सही है ।
मै बीते तीन महीने से मुम्बई मे हूं, मेरी मां किसी कारण बस इस महीने नही आ पायी तो सारा कुछ अपने आप को ही करना है। मै कोई बहुत ही बड़ी बड़े घराने से नही हूं इश्वर कि क्रपा है कि मध्यम वर्ग का सुखमय जीवन है। पर जब मै सुबह से लेकर शाम तक अपने काम को निपटा उसके बाद फुरसत होकर थका मादा जब घर आता हूं तो इसी बात को लेकर चिंतित होता हू कि अरे अभी तो मुझे खाना बनाना है अन्य काम भी करने है मे होटल का भी सहारा ले सकता हूं मगर कब तक कितने दिन नही।हो पाता जिसपे बीती है वही जान पायेगा और याद उस औरत की आती है कि कैसे अपने मन को मारकर न चाहते हुये भी करना पडता है😑 मेरी मां के साथ अपने पिता जी को कभी कभी हांथ बटाते देख मुझमे आज पूरा काम करने की हिम्मत आती है। मुझे तकलीफ होती है कि कैसे वो बेजुबां औरत अपने दर्द व तकलीफों को छुपाते हुये सारे काम करती है जबकि उसका मन नही होता तो भी करती हे। उसके दर्द को हम क्यो नही समझ पाते है क्यो उसे प्रताड़ित करते है आखिर उसमे भी तो जान है वो भी तो खुल के जीना चाहती है आप इस आभासी दुनियां मे आके किसी 4 महीने की अपने महिला मित्र का पूरा खयाल रखते है कि आपने खाना खाया, कि नही क्यो नही खाया, खाओ नही मे भी नही खाउंगा
“आप अपना खयाल नही रखते हो रखा करो ये वो बहुत सारी बातें चलो अच्छी बात है
आप ऐसे ही बर्ताव अपनी पत्नी के साथ क्यो नही करते जिसके साथ आपको सारी जिंदगी बितानी है । उसके भी सपने है ना सोंचिये मै समूह के सदस्यो को ही दोषी नही ठहरा रहा हूं मगर क्या ये गलत है आप ही बताइये ? अब जरूरी तो नही ना कि हमे हर बात #अब्दुल_कलाम और चाचा #नेहरू ही बताये तो ही हम माने। हम अपनी पत्नी पे अपना पूरा क्रोध निकालते है और कब तक जब तक हमारे बगल का पड़ोसी घनश्याम आकर हमे रोंक नही लेता, इतनी निर्लज्जता क्यो आखिर क्योकि वो दूसरे के घर से आयी है, नही आप कभी अपनी बहन और अपनी पत्नी को एक साथ बिठाकर दोनो पे हुवे अत्याचार को सुनना फिर समानता करना दोनो की ।
कहने को तो बहुत कुछ है पर समझने के लिये हमे एक इशारा ही काफी है।
मै कोई सहानुभूति की इच्छा से नही बल्कि आज ये सब देखकर दिल दहल जाता है, हमारी प्यारी ठाकुराइन आप की किस्मत बहुत अच्छी हे कि आपको हम मिलेंगे।

“आज सब यही कसम खाना, कि क्रोध कितना भी आ जाये मगर हांथ नही उठाना। ☝🙏🙏🙏

किसी तरह की त्रुटियां समझ ओआये तो क्षमा चाहता हू।

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