कबीर जी और उनके गुरु की तर्क कहानी

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कबीर जी जिनके दोहों में बहुत ही गहरा प्रेरणादायक सार छुपा है, ये वाक्या कबीर जी और उनके गुरु जी के साथ हुआ। इससे हमें सामाजिक प्रथाओं के बारे में ज्ञान होगा, कि कुछ प्रथाओं का महत्व नहीं होता। लेकिन ये पूर्वजों से चली आ रही हैं, इसी कारण हम भी इस तरह की प्रथाओं को मानते है।

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एक दिन कबीर जी के गुरु ने कबीर जी से कहा की श्राद आने वाले है, मैं पितरों को भोजन करवाना चाहता हूॅं। तुम जाओ और खाने-पिने की वस्तुओं और दूद्ध का इन्तज़ाम करो। कबीर जी ने अपने गुरु का दिया आदेश माना और तुरन्त चल दिए, रास्ते में एक मरी हुई गांय देखी। कबीर जी ने मरी हुई गांय के सामने हरी घास रख दी और खुद वहां बैठ गए।

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काफी समय बीत जाने के बाद कबीर जी के गुरु ने सोचा की कबीर अभी तक क्यों नहीं आया। वे कबीर जी की तलाश करने लगें कि रास्तें में एक आदमी ने कहा गुरु जी कबीर जी तो एक मरी हुई गांय को घास खिलाना चाहते है। उन्होंने गांय के सामने हरी घास डाल दी और बेठ गए की ये गांय उठेंगी और घास खाएंगी, फिर में इसका दूद्ध लेकर चला जाउंगा। ये सुनते ही कबीर जी के गुरु को बहुत गुस्सा आया। वे गुस्से में कबीर जी जहां बैठे थे। वहां गए और पूछा कबीर तूम क्या कर रहे हो।

मैंने तुमको गांय का दूद्ध और बाकी खाने-पिने की साम्रगी के लिए भेजा था। तुम इस मरी हुई गांय को घास कैसे खिलाओंगे? तब कबीर जी ने कहा गुरु जी आप इस गायं जो की आज मरी है आप कह रहे हो कि मैं उसे घास नहीं खिला सकता। लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आता की सैंकड़ों वर्ष पहले मरे हुए पूर्वज जिसे आप पितर बताते हो उन्हें भोजन कैसे कराओंगे? इस प्रश्न का उत्तर कबीर जी के गुरु जी के पास नहीं था। क्योंकि ये बात बिल्कुल सत्य थी, कि जो प्राणी मर चुका है वो इंसान हो या जानवर उसे खाना खिलाना असंभव होता है।

ये कहानी हमें शिक्षा देती है, कि हमारे पूर्वजों के द्वारा बनाई ऐसी प्रथांए जिनका वास्तविक जीवन से कोई तात्पर्य नहीं होता है, फिर भी चली आ रही परमपराओं के कारण मानना पड़ता है। ऐसी ही ज्ञानवर्धक कहानियां पढ़ने के लिए अच्छीख़बर का हिन्दी कहानियों का पेज़ जरूर देखें।

यह आर्टिकल धीरेन्द्र गोयल जी ने भेजा है जो की बहुत ही अच्छे है Hindi Blogger है |
Blog 99हिन्दी http://99hindi.in/
हिन्दी में कहानियां, निबन्ध, कविताएं, आदि की अच्छी जानकारी।
dhirendra-goyal

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6 thoughts on “कबीर जी और उनके गुरु की तर्क कहानी

  1. Dhirendra Goyal

    धन्यवाद सर कहानी प्रकाशन के लिए :)

  2. Wow Very Nice Motivational Story Thanks For Sharing

    1. hindibabu

      Thanks Parul

  3. […] कबीर जी और उनके गुरु की तर्क कहानी […]

  4. Bhaiya ji jo mara hua hai or jo pitra hai dono me farak hai aap ko yadi pata ho to pitra bhi bhagwano ke hi Sam roop hote hai jaise bhagwan ko bhog lagaya jata hai pitron ko bhi aise hi shradho me ya kisi anya moko par bhog lagaya jata hai

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