एक जंगली डाकू की प्रेरक कहानी |

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बहुत सारे लोगो को मैंने यह कहते हुए सुना है की , जो कुछ मैं कर रहा हूँ वह अपने परिवार के लिए कर रहा हूँ | चाहे वह चीज गलत ही क्यों न हो , एक बात तो साफ़ है जो इंसान जो कर्म करात है फल उसी को मिलता है |
बहुत पुरानी बात है , एक बहुत ही घाना जंगल था | उस जंगल में बहुत सारे डाकू रहते थे , लेकिन उनमे से एक डाकू बहुत ही खतरनाक था | उस डाकू का नाम अंगुलीमाल था , पूरा जंगल उसी डरता था | वह इंसान की उंगली को काट कर माला बनाकर पहनता था , इसलिए उसका नाम उंगली माल रखा गया था |

एक दी की बात है कुछ संत लोग उस जंगल से जा रहे थे , उनको इस जंगल के बारे में ज्यादा pata नहीं था |
जब वो लोग जंगल के बीच में पहुंच गए तो उन्होंने अंगुलीमाल को अपनी तरफ आता देखा तो लेकिन बिलकुल भी नहीं डरे | यह देख अंगुलीमाल बिलकुल हैरान हो गया और बोला तुम लोगो को मुझसे डर नहीं लगता है |
एक संत ने बहुत ही साधारण तरीके से बोला नहीं | क्यों हम लोग तुमसे क्यों डरे , अंगुलीमाल हसने लगा और बोला मैं एक डाकू हूँ , तुम लोगो के पास जो कुछ भी है मुझको दे दो नहीं तो मैं तुमको मार डालूंगा |

अंगुलीमाल की यह बात सुनकर एक संत ने बोला तुम ये सब क्यों करते हो ?
अंगुलीमाल ने बोला – यह सब मैं अपने और अपने परिवार के लिए करता हूँ | उसकी यह बात सुनकर संत ने बोला – क्या तुम्हारा परिवार तुम्हारे इस पाप में हिस्सा लेगा |
अंगुलीमाल बोला जरूर लेगा |
संत ने बोला – यह बात तुमने kabhee भी अपने परिवार वालो से पूछा ?
अंगुलीमाल ने बोला नहीं |
संत ने बोला एक बार पूछ कर आवो फिर जो तुम कहोगे हम लोग वही करेंगे | अंगुलीमाल जोर – जोर से हसने लगा और बोला तुम लोग मुझको मूर्ख समझ रहे हो | मैं अपने घर जाऊ और तुम लोग यहाँ से भाग जाओ |
इस पर एक संत ने बोला – तुम हम लोगो को पेड़ में रस्सी से बांध दो फिर जाओ | यह सुनकर अंगुलीमाल राजी हो गया और संत को पेड़ में बांधकर अपने घर चला गया |

अंगुलीमाल घर जाते ही अपनी पत्नी से पूछा जो मैं पाप करता हूँ क्या तुम भी उसमी हिस्सा लोगी | पत्नी ने तुरंत बोला बिलकुल भी नहीं | अंगुलीमाल को बहुत बड़ा झटका सा लगा और वह यही बात अपने bete से पूछा उसने भी यही बात बोला मैं नहीं लूंगा |
अपने घर वालो की यह बात सुनकर उसको बहुत बड़ा सदमा लगा और वह संत लोगो के चरणों में आकर गिर गया और रोने लगा | संत लोगो ने उस अंगुलीमाल डाकू को बहुत समझाया और उसके बहुत आग्रह करने पर वो लोग अंगुलीमाल को अपने साथ लेकर चले गए | बाद में यही डाकू अंगुलीमाल बाल्मीक ऋषि बन गए |

इस कहानी से हम लोगो को यही सीख मिलता है की गुनाह जो भी करता है उसकी सजा भी उसको ही मिलती है |

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