डर इन्सान को कमजोर बना देता है – Guru Bhakti motivational story

Guru Bhakti motivational story
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एक आश्रम था , वहा गुरु जी के कई शिष्य थे | जो गुरु जी के बताए कार्यो को तुरंत कर दीया करते तथा गुरु जी की हर बात  का आदर करते थे | लेकिन सागर नाम का एक शिष्य ऐसा भी था , जो बहुत ही आलसी था , गुरु जी का कोई कार्य नही करता था | प्रतिदिन गुरु जी सागर को समझाते और कहते – चलो तुम अपनी आदत से बाज नही आते तो कोई बात नही …लेकिन मंदिर जाकर भजन आदि तो किया करो, इससे हो सकता है तूम्हारी काया पलट जाए|

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सागर आलसी ज़रूर था मगर अपने गुरु जी को भगवान की तरह मानता था , बस इसी से वह गुरु जी के मन मे रहता था | गुरु जी के बहुत बोलने पर सागर एक दिन मंदिर गया | जैसे ही वह पहुचा मंदिर के मित्रो ने कहा – आओ |

सागर समझ गया यह पहला भजन है , वह बाद मे बैठ गया तो मित्रो ने कहा – बैठ गया |सागर को लगा यह दूसरा भजन है |

कुछ टाइम के बाद सागर जाने लगा तो मित्रो ने कहा- जा रहे हो, सागर को लगा यह तीसरा भजन है | अब हर टाइम वह यही तीनो भजन को दोहराता रहता था आओ, बैठ गये , जा रहे हो |

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एक रात को वह भजन गाते हुए जा रहा था | कुछ चोर चोरी कर के उधर से जा रहे थे , जब उसका पहला भजन आओ –  चोरो ने सुना तो चोरो ने सोचा इस ने हम को देख लिया है |वो नीचे बैठने लगे , इतने मे उसका दूसरा भजन आया -बैठ गये |

चोर घबरा गये और जाने लगे , इतने मे सागर ने तीसरा भजन बोला जा रहे हो ……|चोर यह सुनकर अपना सारा समान वही छोर कर भाग गये |

वह धन को पोटली लेकर आश्र्म मे आ गया और उसने भजन और चोरो की घटना को गुरु जी को सच- सच बता दिया |

कहानी से हमे सीख मिलता है की डर इन्सान को कमजोर बना देता है |

Hindi Moral story

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