महान साइंटिस्ट एडिसन की कहानी

edisan
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उसकी इच्छा सक्ति बड़ी जबरजस्त थी | कब , क्यों और कैसे ? जबतक यह जान न ले उसके सवालो का सिलसिला खत्म ही नहीं होता था |कोई उसके सवालो का जबाब नहीं दे पाता था | उसके सवालो की कोई सीमा नहीं थी , कुछ बड़ा होने पर स्कूल मे प्रवेश हुवा | यहाँ पर भी वही सवालो का सिलसिला | एक दिन अध्यापिका से पूछा – मैडम चिड़िया कैसे उड़ती है | मैडम बोली वह पंखों के कारन उड़ती है | वह फिर बोल पतंग के तो पंख नहीं होते है फिर भी वह उड़ता है | इस पर अध्यापिका को गुसा आ गया और उन्हों  ने इस बालक  को एक झापर गाल पर लगा दिया और बोल ज्यादा मत बोला करो |

परन्तु यह उसकी जिज्ञास का अंत नहीं था ,मार खाकर  कुछ  देर तक तो खामोश जरूर हो गया , लेकिन उसका दिमाग खामोश नहीं हुवा |

अपनी इसी आत्मविस्वास के बल पर ही इस बालक ने बड़े होकर विद्युत (लाइट ) बल्ब और ग्रामोफ़ोन का अविष्कार किया | अखबार बेच- बेच कर अपने अविष्कार के शौक को पूरा करने वाला एडिसन बड़ा होकर महान साइंटिस्ट बना | हमेशा अविष्कारों मे बिजी रहने वाले एडिसन ने बड़े होकर अमरीका को जगमगा दिया | एडिसन ने अपने प्रसनो का उत्तर स्वयं खोजा और महान साइंटिस्ट बन गया |

 

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