दहेज़ प्रथा पर आधारित दिल को हिला देने वाली कहानी

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आज के ज़माने मे दहेज़ एक फैशन बन गया है ,हर आदमी दहेज़ के पीछे भाग रहा है | लोग अपने बच्चों को डॉक्टर या इंजीनियर बनाते है ताकि अच्छा दहेज़ मिल सके | सब से हैरान करने वाली बात ये है जो लड़का डॉक्टर या इंजीनियर बन जाता है वो भी दहेज़ के लिये कभी मना नहीं करता है , क्या मेडिकल  या इंजीनियरिंग कॉलेज मे उसको यही बताया गया की दहेज़ ले कर ही मैरिज करो | हम नए पीढ़ी के लोग ही इस फैशन को बदल सकते है , कुछ लोग तो ये  भी कहते है की दहेज़ नहीं मिला इससे हमारे सम्मान कम हो जाता है |

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रमेश धनकपुर गावों मे किसानी करता है , बड़ी मुस्किल से दो वकत की रोटी अपने परिवार के लिये कमा पाता है | रमेश की एक बेटी महुआ और दो बेटे है , बेटी सबसे बड़ी है और बेटे छोटे है  | महुआ ने  पांचवी पास कर लिया है अब रमेश उस की मैरिज के बारे मे सोच ने लगा , क्यूकी उसके पास अब पैसा नहीं था जो अपनी बेटी को आगे और पढ़ा सके |

रमेश अपने लड़की का रिस्ता लेकर लखन किसान के पास पंहुचा , पहले तो लखन बहुत ही खुश हुआ लेकिन जब रमेश ने उससे कहा की उसके पास देने के लिए कुछ भी नहीं है तो लखन के तेवर बदल गए और कहने लगा मरे पास तो बहुत ही जमीन  है | फिर  उस ने मैरिज करने से मना कर दिया  | रमेश बहुत ही दुखी मन से घर वापस आ गया | घर जब आया तो सब लोग बहुत ही खुश थे और सोच रहे थे की रिस्ता पकआ हो गया , लेकिन बात तो कुछ और थी | साम को रमेश अपनी पत्नी को सब कुछ बताने लगा और उसकी पत्नी की आंखों से अंशु निकल पड़े | रमेश और उसकी पत्नी को लगा सब लोग सो गए है , लेकिन उसकी बेटी महुआ चुपके से सब बात सुन रही थी और अपने आप को बेटी होने पर कोष रही थी | रात भर महुआ को नींद  नहीं आया और सुबह उठ कर उसने ज़हर खा लिए और हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़ कर चली गयी |

दोस्तों कबतक महुआ जैसी लड़कियां आत्म हत्या करेंगी , हम सब को जागरूक होना पड़ेगा | इस पोस्ट को इतना शेयर करो को लखन जैसा दहेज लेने वाले लोग सुधर जाये |

आवो दोस्तों हम सब मिलकर संकल्प करे की इस दहेज़ प्रथा को जड़ से उखाड़ फेकेंगे | जय हिन्द |

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