दर्जी की सोच और उसके बेटे की कहानी जो आप को सोचने पर मजबूर कर देगी

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मोहन अभी आठवीं क्लास में पढ़ाई करता था , वह पढ़ने में अपने क्लास में बहुत ही अच्छा था | उसके पिता जी एक दर्जी थे जो लोगो के कपड़े सीलते थे और उससे जो पैसे मिलते थे वो मोहन की हर जरुरत पूरी करने की कोसिस करते थे | मोहन भी अपने माता – पिता की बहुत ही रेस्पेक्ट करता था और उनकी हर बात को मानता था | मोहन के स्कूल में बहुत ऐसे लड़के थे जिनके पास बहुत सारे खेलने और खाने के सामान होते थे , लेकिन मोहन कभी भी उनकी तुलना नहीं करता था |उसको जो भी मिल जाता था उसमे ही वह खुश रहता था |दीवाली का टाइम था स्कूल की कुछ दिनों की छुट्टिया हो गयी थी | मोहन अब हर रोज अपने पापा के साथ उनके दूकान पर जाता था , वह अपने पापा के काम करने के तरीके को बहुत ध्यान से देखता रहता था | एक दिन वह अपने पापा को काम करते देख रहा था – उसके पापा कैंची को नीचे और सुई को अपने सर पर रखते थे | यह काम वह बहुत देर से देख रहा था जो उससे रहा नहीं गया तो उसने अपने पापा से पूछ ही लिया | मोहन ने बोले – पापा आप कैंची को नीचे और सुई को ऊपर क्यों रख रहे हो , जबकि कैंची आप का कपडा काटती है |

दो विकलांगो की कहानी

मोहन के पापा ने जवाव दिया – बेटा जो चीज अलग करती है उसको हम पैरो में ही रखते है और जो चीज हमको जोड़ती है उसको हम अपने सर पर रख लेते है | मतलब कैंची काटने का काम करती है जबकि सुई कपड़ो को जोड़ने का काम करती है | अपने पापा की यह बात सुनकर मोहन खुश हो गया और स्कूल खुलने पर अपने सारे दोस्तों को यह बात बताया |

दोस्तों कहानी आप को कैसी लगी कमेंट करके जरूर बातये |

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