पूर्ण विशवास की कविता – जो तुझको अपना बना बैठे , उनको दीवाना क्यों समझे

पूर्ण विशवास की कविता – जो तुझको अपना बना बैठे , उनको दीवाना क्यों समझे
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जब तेरे दर पर आ बैठे , कोई और ठीकाना क्यों समझे | जो तुझको अपना बना बैठे , उनको दीवाना क्यों समझे |   जब तेरे हुए तेरे रहे , ये जादू नहीं करिश्मा भी नहीं | यह तेरी ही बस रहमत है , कोई और बहाना क्यों समझे | जो तुझको अपना बना बैठे , उनको दीवाना क्यों समझे |   साकी की नजरो से सबको , वहदत की मय मिल जाती है | ए जाहिद यह तो काबा है , इसको मयखाना क्यों समझे | जो तुझको…

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