बड़ी सोच – एक टिफिन वाले की कहानी

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कबीर अपने गावं का एक लौता पढ़ा – लिखा लड़का था और नौकरी की तलाश में शहर को जा रहा था | वह एक ट्रेन मे बैठ कर जा रहा था , कुछ टाइम बाद शाम हो गयी और वह अपने साथ कुछ रोटिया खाने के लिए ले गया था | जब सब लोग खा रहे थे तब कबीर ने भी सोचा मे भी खाना खा लू , क्युकी उसके पास सब्जी नहीं थी तो वह बहुत ही शर्म कर रहा था | लेकिन थोरी देर बाद वह अपना टिफिन खोला और खाना सुरु कर दिया | वह अपने रोटियों को टिफिन मे डूबा कर खाने लगा , जबकी उसके टिफिन मे कुछ भी नहीं था |

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फिर भी वह खाना खाए जा रहा था , यह सब देख कर वहा बैठे लोग बहुत ही ज्यादा सोच मे पड़ गए की उसके टिफिन मे कुछ है भी नहीं फिर भी वह उसमे रोटी को डूबा कर खाए जा रहा है | जब वह ऐसा कर रहा था तभी वहा बैठा एक आदमी ने पूछ ही लिया की भाई आप की टिफिन मे तो कुछ भी नहीं है फिर भी आप उसमे रोटी को डूबा कर खा रहे है | इस पर कबीर ने जवाब दिया की मुजको भी पता है की मेरी टिफिन मे कुछ नहीं है लेकिन मे उसमे अचार समझ कर खा रहा था | तो इसपर उस आदमी ने बोला की आप को अचार का टेस्ट आ रहा था | तो कबीर ने बोला हा , आप जैसा सोचोगे वैसा ही आप को महसूस होगा |

मे अचार समझ कर खा रहा था तो मुजको उसी का टेस्ट आ रहा था | इस पर उस आदमी ने जवाब दिया की जब आप को सोच कर ही खाना है तो पनीर सोचो , दाल सोचो | मतलब की जब आप सोच ही रहे हो तो कुछ बड़ा सोचो , छोटा क्यों सोचो | यह सुनकर कबीर की आँखों मे बहुत ही गंभीरता थी और वह अब यह समझ चूका था की जीन्दगी मे जो सोचो बड़ा सोचो |

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दोस्तों इसी तरह हमारी जीन्दगी मे भी होता है की हम लोग छोटे से काम के पीछे परेशान रहते है , लेकिन कुछ आप को करना है तो बड़ा सोचो और बड़ा करो | हो सकता है सुरुआत मे आप को सफलता कम मिले लेकिन बाद मे आप को बहुत ही अच्छा रिजल्ट मेलेगा |

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3 thoughts on “बड़ी सोच – एक टिफिन वाले की कहानी

  1. Mahesh soren

    Jhakas hai khahani

    1. hindibabu

      Thanks a lot.

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