कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट कर घर न आये – अमर शहीदों की कहानी

bhagat singh
Share Button

देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व नैछावर करने वाले अमर शहीद भगत सिंह , सुखदेव व राज गुरु को 1930 मे फाँसी का दंड मिला था | इन युवको को छुड़ाने के लिए हाई कोर्ट मे अपील की गयी परन्तु वह अमान्य हो गयी | प्रीवी कौंसिल मे भी अपील की गयी लेकिन कुछ नहीं हुवा | सरदार भगत सिंह तो ऐसी अपील के विरुद्ध थे | वह वीर तो मौत को भी हँसते – हँसते निमंत्रण देता था | फाँसी का दिन २४ मार्च सन 1931 को तय हुवा | जेल के मुताबिक फाँसी सुबह मे होती है ,लेकिन सरकार इतनी डरी हुयी थी की उनको २३ मार्च 1931 को शाम को ही फाँसी दे दी गयी | फाँसी पर झूलने से पहले इन वीरो ने स्वतंत्रता का गाना गाया और हँसते – हँसते फाँसी का फंदा गले मे डाल लिया |
ये दोनों वीर अदालत जाते समय जनता के साथ उत्साह से नारे लगाते और आकश को गूँजा देते | भगत सिंह ने तो छोटी अदालत मे तो बयान देने से इनकार कर दिया , इस पर उनको सेन्सन कोर्ट ले जाया गया | वहाँ उन्होंने अपने बयान मे कहा – “हमने जो कुछ किया है जान बूझ कर किया है , इसके लिए हम दंड भुगतने को तैयार है , हम तो केवल अंगरेजी शासन को बताना चाहते है की भारतवासी अब किसी भी तरह का अत्याचार सहन नहीं करेंगे ” | अदालत ने उनको १२ जून १९२९ को काला पानी का सजा दिया , जिसको उन्होंने हँसते – हँसते स्वीकार कर लीया |

भगत सिंह पर दूसरा मुकदमा सांडर्स की हत्या और बम फेक कर लोगो मे भय पैदा करने का दोष लगाया | इसके लिए उनको एक साल जेल मे बंद रहना पड़ा | स्वतंत्रता का वह पुजारी जेल जीवन से ऊब गया और जेलर को पत्र लिखा – हमने अपने भारत माँ से प्रेम करने का अपराध किया है | हमें या छोड़ दिया जाये या सेना बुलाकर गोली ,मार दिया जाये |

मुक़दमे के बीच मे एक बार सरकारी वकील के बयान पर भगत सिंह जी को हँसी आ गयी , इसपर सरकारी वकील ने कहा – आप अदालत का अपमान कर रहे है | इसपर वीर भगत सिंह हँसकर बोले – मे तो जीवन भर हँसता रहूँगा | आज आप हम पर दोष लगा रहे हो परंतु जब मे फाँसी के तख्ते पर हसूंगा तब आप कौन सी अदालत मे सिकायत करोगे |
मेरे देश के वीरो , वीर भगत के साथ माँ के सच्चे सपूतो को याद करना हमारा कर्म है | इन वीरो ने हँसते – हँसते अपनी सुखो भरी जिन्दगी अपनी भारत माँ के लिए भेट कर दिया |
जय हिंदी | भारत माता की जय |

Share Button

loading...
loading...

Related posts

2 thoughts on “कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट कर घर न आये – अमर शहीदों की कहानी

  1. बहुत ही अच्छा article है। …. Thanks for sharing this!! :)

    1. hindibabu

      Thanks HindiIndia

Leave a Comment