बारिश में जब उसकी याद आयी | बीते लम्हे जब याद आते है |

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बाहर बारिश हो रही है, झमझमा के,
चाय बनाये है बॉलकोनी के बैठ कर चाय पीते हुए देख रहे थे इन बारिश के बूंदों को की अचानक से सब को किनारे करते हुए तुम्हारी याद आ गई, हमेशा की तरह यादों के दरवाजों धकेलते हुए जैसे जी ये आई सब रुक सा गया, बारिश की वो बूंद, चाय से उठती भाप और नीम के पेड़ की पत्तियां सब की सब.लगा जैसे जिंदगी फ़िर उसी मेज़ पर जा कर रुक गयी जहाँ तुम मिले थे मुझसे, बारिश की वो बूंद जो टिकी थी balcony की रेलिंग पर ध्यान से देखा तो उसमें वो सब पिछला दिखने लगा मुझे, कॉफ़ी नही पीनी है हमे से लेकर, रुको अभी जाने तक का सफ़र वो तुम्हारा मुस्कुराना, और सुकून खोजते हुए, मेरे सीने पर सर रख देना, वो बिना बात के गुस्सा हो जाना, और फिर अगले ही पल ये ही भूल जाना कि तुम गुस्सा भी थे। मन किया तुम्हे msg करू आज, फ़ोन उठाया और फिर हमेशा की तरह तुम्हारा नेट ऑफ देख कर, तुम्हारी वो कोहनी पर टिका सर वाली pic जो शायद बस में ली है तूमने देख कर फिर खो जाने में ही सही लगा,
कमरे में जा कर ईरफ़ोन खोजा, 

 

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आखिर मिला हमेशा की तरह और मेरी जिंदगी जैसा उलझा हुआ,
ईरफ़ोन सुलझाते हुए बस यही सोच रहा था कि अगर सब रिश्ते भी ऐसे ही सुलझ जाए तो कितना असां हो जाये सब, फिलहाल ईरफ़ोन लगाते ही track शुरू हुआ
~अधूरी आस छोड़ के, अधूरी प्यास छोड़ के
जो रोज़ यूँ ही जाओगी, तो किस तरह निभाओगी….
चलो उठते है अब यहाँ से, बारिश बंद हो गयी है,
चाय भी ख़त्म हो गयी है, track अब भी चल रहा है, और यादें अब भी झलक बनाये हुए है,
दूर कही एक गाना बज रहा है,
जो स्ट्रीट लैंप की रोशनी से होता हुआ balcony तक आ रहा है
~लग जा गले की फ़िर ये हँसी रात हो न हो
शायद फिर इस जन्म में मुलाकात हो न हो

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