जाने गुरु पूर्णिमा क्यों मनाया जाता है ?

guru purnima ke kahani
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गुरु पूर्णिमा हमारे देश की एक बहुत ही अच्छी परम्परा है | बहुत ही पुराने समय से चली आ रही यह परम्परा गुरु और उसके शिष्य की है | हम सब लोग को यहाँ पता है की बिना गुरु के ज्ञान मिलना बहुत ही मुश्किल है | तो गुरु पूर्णिमा को हम सब लोग अपने गुरु के लिए ब्रत रकते है और उनका आशीर्वाद लेकर अपने जीवन को धन्य बनाते है |

गुर गोविन्द दोउ खड़े , काके लगे पाँव , बलिहारी गुरु आप ने गोविन्द दियो बताय |

कभी – कभी हम लोग खुद नहीं समझ पाते है की गुरु और भगवान् में बड़ा कौन है | आप देख सकते हो की एक दिन एक शिष्य के सामने गुरु और भगवान् दोनों सामने आ जाते है , शिष्य को लगता है की भगवान् बड़ा है और सबसे पहले भगवान् का पैर छूना सही है | लेकिन भगवान् को लगा की आज अगर इसने अपने गुरु का आशीर्वाद नहीं लिया तो इसकी दीक्ष पूरी नहीं होगी | भगवान् को जब लगा की शिष्य बहुत ही मुश्किल में है और समझ नहीं पा रहा है तो , गोविन्द भगवान् ने धीरे से गुरु की तरफ इशारा किया और बोला की सबसे पहले आप अपने गुरु का पैर छू कर आशीर्वाद ले | यह देखकर शिष्य भी बहुत खुश हुवा और सबसे पहले गुरु का आशीर्वाद लिया | तो हम लोग देख सकते है की गुरु का दर्जा भगवान से भी ऊपर है |

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आप लोगो ने एकलब्य के बारे में भी सुना होगा जो की अपने गुरु की फोटो अपने सामने रखकर धनुष की विद्या में पारंगत हुवे थे | लेकिन जब उनके गुरु ने उनसे गुरु दक्षिणा मांगा तो उन्होंने तुरंत देने को तैयार हो गए और उनके गुरु ने उनका अंगूठा ही मांग लिया फिर भी एकलब्य ने बिना संकोच के अपना अंगूठा अपने गुरु को दान दे दिया | हम लोगो को भी अपने गुरु जी लोगो का सम्मान करना चाहिए |

गुरु पूर्णिमा में क्या करना चाहिए –

सुबह सबसे पहले उठ कर हम लोगो को अपने गुरु को याद करना चाहिए और इसके बाद सूरज निकलने से पहले ही नहा कर गुरु जी पूजा – पाठ करके अपने मन को साफ़ करे | इस ब्रत को तोड़ने का समय शाम को चाँद निकले के बाद किया जाता है , उससे पहले आप लोग अपने गुरु का आशीर्वाद जरूर ले |
गुरु पूर्णिमा एक ऐसा पर्व है जो की गुरु और शिष्य के रिस्ते को बनाये रखता है | हम लोगो को मिलकर गुरु पूर्णिमा का सहयोग करना चाहिए |

हिंदी बाबू की तरफ से आप लोगो को गुरु पूर्णिमा की ढेर सारी शुभ कामना || धन्यवाद ||

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