संत का वचन – एक सेठ की कहानी

seth story in hindi
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यह घटना बहुत समय पहले की बात है , एक सेठ जी थे | एक बार उनसे मिलने कुछ मित्र आ पहुंचे , बातो ही बातो मे कही चलने की बात पर सभी लोग राजी हो गए | उनमे से एक आदमी धार्मिक प्रवित का था | उसने सब मित्रो को कहा चलो आज तुम लोगो को एक संत जी के पास ले चलते है | उसकी बात सुनकर सब लोग सहमत हो गए | सेठ जी ने अपनी बड़ी सी गाड़ी निकाली और सब लोग उस पर सवार होकर चल दिया | संत जी के निवास स्थान पर सब लोग पहुंच गए और बड़ी ही सान से कार से बाहर निकले और घर के अंदर चल दिया | संत जी ने हसकर उनसब का स्वागत किया | धार्मिक विचार वाला आदमी बोला – महाराज मेरे इस सेठ मित्र को ज्ञान दे |
महाराज जी ने पहले बड़े ध्यान से सेठ जी की तरफ देखा और उसको फिर ज्ञान देना सुरु कर दिया | उस सेठ जी ने संत से ज्ञान तो लिया लेकिन माया मे पूरी तरह से डूबे होने के कारन उसका असर उस पर बहुत कम हुवा | संत जी ने उस आदमी से पूछा भी की ब्रह्म ज्ञान आप को समहज आ गया की नहीं ?

 

 
सेठ जी बोले – ठीक है आप की बात तो लगती सही है लेकिन अभी मे थोड़ा और टाइम लेकर आप को बताऊंगा | संत जी ने बोला आप खूब अच्छी तरह सोच लेना तब हम को बताना |सेठ जी अपने दोस्तों के साथ बहार आये और अपने गाड़ी मे बैठ कर स्टार्ट करना सुरु कर दिया , लेकिन गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई | सेठ जी ने वह बैठे लोगो को पुकारा और सब लोग आकर उनकी गाड़ी को धकेल और वह स्टार्ट हो गयी | सेठ जी ने जब पीछे मुर कर देखा तो सारे संत लोगो ने ही उनकी गाड़ी को धकेला , यह देखकर सेठ जी गाड़ी से उतर गए और उनकी आँखे नम हो गयी थी | संत महाराज जी मुस्कुराये और बोला – यही है ज्ञान और सोच का फर्क हम सब लोगो को एक दूसरे का साथ देना चाहिए तभी हम अपनी मानवता को जिन्दा रख सकते है |

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