फैक्टरी में काम करने वाले मजदूर की इमोशनल कहानी

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हम सब लोग अपने आप में इतना मस्त है की हम लोगो को यह भी नहीं पता होता है की मानवता नाम की भी कोई चीज होती है । आज मैं आप लोगो को एक ऐसी ही कहानी सुना रहा हूँ , जिसको सुनकर आप का मन एक दम सोचने पर मजबूर हो जायेगा ।
करन एक चॉकलेट बनाने वाली कंपनी में काम करता था , एक दिन की बात है उसको काम पूरा करते – करते लेट हो गया और वह उस कमरे में पहुंच गया जहा पर सारी चॉक्लेट को ठंडा किया जाता था । पूरा कमरा इतना ठण्ड था की कोई भी आदमी कुछ घंटो बाद मर सकता था ।

 

करन को यह एहसास होने लगा की अब वह मुश्किल ही बच पायेगा , क्युकी बहुत रात हो गयी है और कोई भी अब अंदर आएगा नहीं और वह ठण्ड से ही मर जायेगा । अब वह भगवान् से दुवा कर रहा था की कोई तो भेज दो जो मुझको बचा ले , नहीं तो मेरे बीबी और बच्चो का क्या होगा । वह जोर – जोर से रोने लगा और बोला हे भगवान् कोई भी अगर अच्छा काम मैंने किया हो तो एक बार मुझको बचा लो ।

 

वह जब जोर – जोर से रो रहा था , तभी बाहर बैठे गार्ड को कुछ सक हुवा और वह अंदर आया तो सामने एक आदमी को बेहोश देखा तो उसको समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे और कैसे करे ।उसने तुरंत ही उस आदमी को उठाया और ले जाकर हीटर से उसके सरीर को कपडे खूब गरम किया और कुछ ही देर बाद उसको होश आ गया ।

 

वह आदमी उस गार्ड को बोला मैं आप का यह एहसान कभी नहीं भूलूंगा । फिर उस गार्ड ने बोला भाई तुम रोज मुझको आते और जाते नमस्ते करते थे लेकिन आज तुम न बाहर आये और न ही मुझको तुम्हारी आवाज सुनायी दिया । यहाँ बहुत ही काम लोग है जो मुझको नमस्ते करते है लेकिन तुम एक ऐसे इंसान हो जो मुझको जितनी बार देखते हो उतनी बार नमस्ते करते हो । आज जब तुम फैक्ट्री से बाहर नहीं आये तब मुझको कुछ गड़बड़ लगा और मैं फैक्ट्री के अंदर

गया और वह पर मैंने तुम्हारे जोर – जोर के रोने की आवाज आयी , जबतक मैं उस कमरे में पंहुचा तबतक तुम बेहोश हो गए थे । और फिर मैं तुमको यहाँ पर लाया ।

तो दोस्तों इस कहानी से हम लोगो को यही सीख मिलता है की उस आदमी की जान सिर्फ और सिर्फ नमस्ते करने वाले गार्ड ने बचा लिया ।इसलिए कहा गया है की जैसा आप करोगे वैसा ही आप पावोगे \

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